नामकरण की रोचक कथा: "मोती नगर" कैसे पड़ा नाम?
लोकश्रुति और रियासती अभिलेखों के अनुसार, 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में यहाँ प्राकृतिक मीठे पानी के ऐसे शुद्ध जलस्रोत थे, जिनका जल मोतियों की भांति चमकता था। जब बूंदी के तत्कालीन नरेश राव राजा उम्मेद सिंह शिकार के दौरान इस क्षेत्र से गुजरे, तो इस निर्मल जल से तृप्त होकर उन्होंने इस बस्ती को 'मोती नगर' नाम दिया और यहाँ मोती बावड़ी के निर्माण का शाही फरमान जारी किया।







